शी जिनपिंग की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम: 14 साल बाद भी क्यों नहीं थम रही?
शी जिनपिंग की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम: 14 साल बाद भी क्यों नहीं थम रही?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सत्ता संभालते ही 2012 में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा था। इसे “बाघ और मक्खी” (उच्च पद के अधिकारी और छोटे कर्मचारी) दोनों को निशाना बनाने वाला अभियान कहा गया। आज 2026 में भी यह मुहिम जोरों पर है—लाखों अधिकारी जांच के घेरे में, कई बड़े नाम गिरफ्तार या हटाए गए। हाल ही में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) में सैकड़ों सीटें खाली दिखीं, क्योंकि डेलीगेट्स को हटा दिया गया। आखिर यह अभियान इतने सालों से क्यों जारी है और रुकने का नाम नहीं ले रहा?
असली भ्रष्टाचार की समस्या कितनी गहरी है?

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में 10 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं। अधिकारियों को कम वेतन मिलता है, सत्ता बहुत केंद्रित है, और कोई बाहरी निगरानी नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि रिश्वतखोरी और घूसखोरी सिस्टम में गहरे पैठ चुकी थी। शी के आने से पहले भी पूर्व नेता इसे पार्टी के लिए बड़ा खतरा मानते थे।
- 2012 से अब तक: लाखों-करोड़ों अधिकारी दंडित हुए। 2025 में अकेले लगभग 10 लाख लोगों पर कार्रवाई।
- जनवरी 2026 में: 10 बड़े “बाघ” (टॉप अधिकारी) पकड़े गए।
- कई मामलों में यह साफ भ्रष्टाचार है—जैसे सेना में रैंक और प्रमोशन बिकते थे, बड़े ठेके घूस से मिलते थे।
कुछ विश्लेषक कहते हैं: “आश्चर्य इस बात का नहीं कि लोग रिश्वत लेते हैं, आश्चर्य इस बात का है कि कुछ लोग नहीं लेते।” इसलिए कार्रवाई जारी रहती है।
राजनीतिक नियंत्रण और वफादारी का खेल
यह सिर्फ पैसे की सफाई नहीं है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह शी की सत्ता को मजबूत करने का सबसे बड़ा हथियार बन गया है।
- विरोधियों को हटाना: शुरुआत में बो शिलाई, झोउ योंगकांग जैसे बड़े नाम गिरे, जो शी के संभावित प्रतिद्वंद्वी थे।
- सेना में सफाया: पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के 52% टॉप पद प्रभावित। हाल ही में हे वीडोंग, मियाओ हुआ, झांग यौशिया (शी के पुराने सहयोगी) जैसे जनरल हटाए या जांच में। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन अब सिर्फ दो सदस्यों तक सिमट गया।
- “वफादारी की जांच”: अब आरोप सिर्फ भ्रष्टाचार के नहीं, बल्कि “अनुशासनहीनता”, “पार्टी के प्रति कमजोर निष्ठा” भी लगते हैं।
शी का मानना है कि बिना अनुशासित पार्टी और सेना के चीन अमेरिका से मुकाबला नहीं कर सकता। अर्थव्यवस्था धीमी है, युवा असंतुष्ट हैं—ऐसे में एकजुटता और नियंत्रण सबसे जरूरी है। भ्रष्टाचार को “पकड़ो जितना, निकलेगा उतना गहरा” कहकर पार्टी इसे जड़ से खत्म करने की कोशिश बता रही है।
विरासत और अस्तित्व की लड़ाई
शी के लिए यह अभियान उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है। वे सोवियत संघ के पतन से डरते हैं—भ्रष्टाचार ने वहां पार्टी को कमजोर किया था। वे कहते हैं: “भ्रष्टाचार पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है, इसे हारना मंजूर नहीं।”
- सेक्टर-विशेष फोकस: टेक, AI, रिन्यूएबल एनर्जी, मिलिट्री—ये क्षेत्र जहां चीन दुनिया में नंबर 1 बनना चाहता है, वहां भ्रष्टाचार ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
- जनता का समर्थन: आम चीनी लोग भ्रष्टाचार से परेशान हैं। यह अभियान शी की छवि “ईमानदार नेता” की बनाता है और “राष्ट्रीय पुनरुत्थान” की कहानी को मजबूत करता है।
क्या यह कभी रुकेगा?
नहीं लगता। हाल ही में क्रॉस-बॉर्डर भ्रष्टाचार पर नया कानून बनाने की बात हुई। सेना में “राजनीतिक निष्ठा” पर जोर बढ़ा। विश्लेषक कहते हैं: “जितनी ज्यादा ताकत शी के पास, उतनी ज्यादा सफाई।” उनका दायरा अब इतना सिकुड़ रहा है कि सिर्फ “पूरी तरह वफादार” लोग बच रहे हैं।
यह मुहिम भ्रष्टाचार खत्म करने के साथ पार्टी को शी के नियंत्रण में रखने, वफादारी सुनिश्चित करने और उनकी लंबी सत्ता को सुरक्षित करने का तरीका है। 2026 में भी यह “पार्टी बचाने” और “चीन को महान बनाने” की लड़ाई का हिस्सा बना हुआ है।
(यह संस्करण मूल लेख की मुख्य बातों पर आधारित है, लेकिन अलग ढंग से, नई संरचना और शब्दों के साथ लिखा गया है ताकि यह मूल अंग्रेजी या पिछले हिंदी संस्करण से शब्दशः मैच न करे। ज्यादा जानकारी या कोई बदलाव चाहिए तो बताएं!)